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GOLD: थोड़ी धीमी लेकिन एक रियल स्टोरी जो की हर इंडियन को जज्बाती कर देगी

Great performances by the entire star cast

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कहीं न कहीं गोल्ड हर हिंदुस्तानी के दिल को छू जाती है. कहने को तो इंडिया और पाकिस्तान आज पडोसी देश है लेकिन कही न कही बहुत ज्यादा मतभेद भी है लेकिन एक टाइम ऐसा भी था जब दोनों टीमें एक दूसरे को चियर्स करती थी.
कहानी
ये शुरुरात होती हैं 1935 के ओलिंपिक खेलो से जिस टाइम भारतीय हॉकी टीम ओलिंपिक में गोल्ड मेडल तो जीत जाती हे लेकिन ब्रिटिश इंडिया के वजह से अपने देश का न झंडा फेरा पाती हे न है राष्ट्रगान गए पाती हे.
टीम के मैनेजर तपन दास (अक्षय कुमार) को यह बात दिल पर लग जाती हे और वो ठान लेता हे की जिस दिन देश आज़ाद होगा तो फिर ओलिंपिक मैं गोल्ड जीतेंगे और अपना तिरंगा फेरायेंगे. आज़ादी की लड़ाई के टाइम तपन दास को पता लगता हे की अगला ओलिंपिक 1948 में होने वाला हे लेकिन इंडिया पाकिस्तान दो अलग मुल्क बनने के बाद हॉकी के कुछ बेहतरीन खिलाडी पाकिस्तान चले गए अब उसके सामने चुनौती होती हे टीम इंडिया को तैयार करना ऐसे मुश्किल टाइम मैं वो कैसे टीम इंडिया को तैयार करता हे और कैसे विपरीत परिस्थतिओं मैं देश का सर ऊँचा करता हे.
एक्टिंग
अक्षय कुमार इस फिल्म में खुद को हीरो के रूप में न दिखाते हुए भी प्रमुख भूमिका में हे, मूवी में कई अच्छे कलाकार होते हुए भी वो लाइमलाइट में नहीं आ पाए.
गाने:
इस मूवी में ८ गाने हे लेकिन कोई भी ऐसा गाना नहीं हे जो की दर्शको के दिल को छुए, मूवी से निकलने के बाद शायद ही कोई गाना आप गुनगुनाएं.

80%
Awesome
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